Re: श्री जुगल किशोर को जाप है, मंत्र तारतम सोए - लेख
श्री जुगल किशोर को जाप है , मंत्र तारतम सोए। भूमिका: तारतम वाणी और बीतक में मंत्र संबंधी चर्चा विविध संदर्भों में मिलती है। सुन्दरसाथ जी की मंत्र विषयक स्पष्टता हेतु, यहाँ मंत्र परंपरा का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत है। साथ साथ हिन्दू धर्मशास्त्रों और विश्व की धार्मिक परंपराओं के आलोक में उसकी महिमा , सीमा और साधना-विधिइस विषय पर समग्र दृष्टि से भी प्रकाश डाला गया है ताकि सम्पूर्ण विषय की स्पष्टता हो। मंत्र संबंधी कुछ चौपाईयां: तब हरिदास जी ने कह्या , श्री देवचन्द्र जी सो वचन। श्री देवचन्द्र जी बड़ो मंत्र है , ए रखों तुम्हारे तन।। जो एक घड़ी फुरसत , न होती मंत्र कहने में। तो प्राण न रहते इन के , होत ऐसो उपकार इन से।। सो मंत्र जिन उर में रहे , तहां ए कैसे समाय। तब हरिदास जी रीझ के , सिफत करी बनाय।। सो ए मंत्र कैसा है , जो लाख बिच्छू का दुख। सो जनम और मरण का , छुड़ाय के देवे सुख।। बीतक घर परवत उठो नहीं , तब हार के बैठा ठौर। पंच वासना सब देव जहाँ खड़े , तहाँ मंत्...