“नहाज़ो माया माहें कोरा रहेजो”
“नहाज़ो माया माहें कोरा रहेजो” दुनिया में पूरे मन से जियो, अपनी सच्ची पहचान याद रखो सारना सारसू बंध बाँधजो, करजो रे नित नवलो रंग। नहाज़ो माया माहें कोरा रहेजो, छूटतां आयास जेम न आवे रे अंग।। —कीर्तन १३१/२४ अच्छे अंक चाहिए, दोस्तों का साथ चाहिए, खेल में जीतना है और सोशल मीडिया पर हमारी पोस्ट भी पसंद की जाए—ये सब इच्छाएँ हमारे जीवन का हिस्सा हैं। लेकिन जब अंक, जीत या दूसरों की राय ही हमारी खुशी और अपनी नज़रों में हमारी कीमत तय करने लगे, तब क्या करें? तारतम वाणी हमें रास्ता दिखाती है— “नहाज़ो माया माहें कोरा रहेजो।” इसका सरल संदेश है: संसार में रहो, सीखो, खेलो, प्रेम करो और अपनी जिम्मेदारियाँ निभाओ; लेकिन इन सबके बीच अपने भीतर की सच्चाई, प्रेम और शांति को सँभाले रखो। “कोरा” रहने का अर्थ भावनाहीन होना या किसी की परवाह न करना नहीं है। इसका अर्थ है—किसी चीज़ से इतना न चिपक जाना कि उसके बिना हम स्वयं को बेकार समझने लगें। जैसे कमल का पत्ता पानी में रहता है, फिर भी पानी उस पर टिकता नहीं, वैसे ही हम जीवन में भाग लेते हुए भीतर स्वतंत्र रहना सीख सकते हैं। अंक तुम्हारे काम का परिणाम ह...