एक ही चौपाई में समग्र चेतना-विकास का इंटीग्रल दर्शन
तारतम वाणी की एक चौपाई में समग्र चेतना-विकास का इंटीग्रल दर्शन वेकिंग अप, ग्रोइंग अप, क्लीनिंग अप, शोइंग अप और ओपनिंग अप का अद्भुत समन्वय प्रस्तावना अर्थ-संकट (Metacrisis of Meaning) के युग में जागनी की आवश्यकता आज का संकट केवल आर्थिक, राजनीतिक या मानसिक तनाव का संकट नहीं है। यह उससे भी गहरा संकट है — एक “अर्थ-संकट” (Metacrisis of Meaning)। आधुनिक मनुष्य के पास पहले से अधिक सुविधाएँ, विकल्प, मनोरंजन और उपलब्धियाँ हैं, फिर भी भीतर बेचैनी, दिशाहीनता, अकेलापन, चिंता और शून्यता बढ़ती जा रही है। मानव इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है कि मनुष्य ने बाहरी जीवन को इतना विकसित कर लिया, पर भीतर यह प्रश्न अधिक तीव्र हो गया: “मैं यह सब क्यों कर रहा हूँ?” “मेरे जीवन का अर्थ क्या है?” “क्या केवल सफलता और उपभोग ही जीवन का लक्ष्य हैं?” आधुनिक समाज ने “Enjoyment” (आनंद-भोग) और “Achievement” (उपलब्धि) को अत्यधिक विकसित किया, लेकिन “Meaning” (अर्थ) का आयाम धीरे-धीरे कमजोर होता गया। परिणामस्वरूप: मनोरंजन बढ़ा, पर शांति नहीं, सूचना बढ़ी, पर स्पष्टता नहीं, संपर्क बढ़े, पर आत्मीय...