एकेश्वरवाद” (Monotheism) या “अद्वैतवाद” (Non-dualism)
“ एकेश्वरवाद” ( Monotheism) या “अद्वैतवाद” ( N on-dualism): कौन-सा अभिगम उत्तम है—या फिर दोनों का एकीकरण ? तारतम-ज्ञान के संदर्भ में ‘स्वलीला-अद्वैत’ का प्रस्ताव नरेन्द्र आर. पटेल , M.S., CSP ( सेवानिवृत्त) पूर्व University Safety Coordinator , रटगर्स विश्वविद्यालय , न्यू जर्सी , यू.एस.ए. सारांश ( Abstract) यह शोध-पत्र “एकेश्वरवाद बनाम अद्वैतवाद” की बहुचर्चित बहस को तारतम-ज्ञान और महामति प्राणनाथजी की शिक्षाओं के आलोक में पुनः परखता है। आधुनिक विमर्श में एकेश्वरवाद को कभी आध्यात्मिक एकता और भक्ति-ऊष्मा का आधार माना जाता है , तो कभी उसे असहिष्णुता , “ हम-वे” विभाजन और राजनीतिक दुरुपयोग के जोखिम से जोड़ा जाता है। दूसरी ओर अद्वैतवाद को परम-एकता , भय-निवारण और मुक्तिबोध का चरम माना जाता है , पर कई बार वह “निर्गुण-शून्य” अनुभव पर ही समाप्त होकर प्रेम-रस , दिव्य-लीला और व्यक्तित्वमय साकार सत्य के आयाम को गौण कर देता है। इस लेख का तर्क है कि तारतम-ज्ञान को न तो संकीर्ण एकेश्वरवाद (एक ईश्वर-एक किताब-एक समूह) में सीमित किया जा सकता है , और ...