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स्वतंत्रता दिवस 2024

सप्रेम प्रणाम! प्रणाम जी! नमस्ते!  भारत देश के स्वतंत्रता दिवस की बधाई। इस अवसर को अभिन्न तरीके से मनाने में उन मूल्यों और प्रथाओं को शामिल करना है जो समावेशिता, आपसी समझ और देश की संस्कृति और इतिहास के समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाले हों। तारतम्य की विधी और तारतम का ज्ञान दोनों की सहायता से - श्री प्राणनाथ जी, सुंदरसाथ जी एवं महाराजा छत्रसाल जी के प्रयासों को याद करते हुए, उनका धन्यवाद करते हुए, हम सुंदरसाथ भी इन सुझावों पर अमल कर सकते हैं:  1. **समावेशी समारोह**: सुनिश्चित करें कि समारोहों में देश के विभिन्न समूहों, विभिन्न जातियों, लिंगों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोग शामिल हों।  यह जातीय-केंद्रित मूल्यों से आगे बढ़कर अधिक विश्व-केंद्रित और अभिन्न मूल्यों की ओर बढ़ने के विचार के अनुरूप है। 2. **शैक्षणिक कार्यक्रम**: ऐसे कार्यक्रम आयोजित करें जो नागरिकों को देश के इतिहास के बारे में शिक्षित करें, जिसमें इसकी उपलब्धियाँ और संघर्ष दोनों शामिल हों।  यह राष्ट्र की यात्रा और उसके लोगों के अंतर्संबंध की गहरी समझ को बढ़ावा देने में मदद कर सक...

વિના શ્રી કૃષ્ણ જી જેતી મત

વિના શ્રી કૃષ્ણ જી જેતી મત - આવશ્યક સ્પષ્ટીકરણ 2-2026.pdf

जोश और आवेश: रास–अरब–मेअराज–जागनी के आलोक में दो दृष्टिकोणों का तारतम्यपूर्ण तुलनात्मक अध्ययन

जोश और आवेश: रास–अरब–मेअराज–जागनी के आलोक में दो दृष्टिकोणों का तारतम्यपूर्ण तुलनात्मक अध्ययन (Josh & Aavesh: A Tārātamya-Based Comparative Study) 1) सारांश (Abstract) तारतम वाणी, बीतक और व्याख्या-परंपरा में "जोश" और "आवेश" शब्द साधारण शब्द नहीं हैं। ये शब्द किसी भावुकता या उत्तेजना मात्र के अर्थ में नहीं आते, बल्कि  परम सत्ता/परम चेतना की उस दिव्य शक्ति  को सूचित करते हैं, जो समय-समय पर अलग-अलग "लीला-स्तरों" में अलग भाषा-रूप लेकर प्रकट होती है। विद्वानों के बीच दो मुख्य पढ़त (readings) मिलती हैं—(1)  जोश और आवेश तत्त्वतः एक ही हैं , केवल भाषा बदलती है; (2)  दोनों में सूक्ष्म कार्यात्मक भेद है , जैसे कारण-रूप और फल-रूप। यह लेख दिखाता है कि तारतम्य (integrative ordering) की दृष्टि से ये दोनों पढ़तें विरोधी नहीं, बल्कि  एक ही तत्त्व को दो स्तरों पर समझने के तरीके  हैं—और "रास–अरब–मेअराज–जागनी" की प्रमाण-श्रृंखला (1–10) इस समन्वय को अधिक ठोस करती है। 2) भूमिका (Introduction): यहाँ विवाद क्यों पैदा होता है? आध्यात्मिक ग्रंथों में शब्द "defin...