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जागनी और चेतना का विकास

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"> जागनी और चेतना का विकास विविध चेतना-स्तरों और श्रीमद् तारतम वाणी के आलोक में मानव विकास की समग्र यात्रा प्रस्तावना आज का मनुष्य केवल यह नहीं पूछता कि "धर्म कौन-सा सही है ?" बल्कि यह भी पूछता है— लोग अलग-अलग प्रकार से क्यों सोचते हैं ? कोई शक्ति को सर्वोच्च क्यों मानता है ? कोई नियमों के लिए क्यों जीता है ? कोई विज्ञान को अंतिम सत्य क्यों मानता है ? कोई प्रेम और करुणा को सर्वोच्च क्यों मानता है ? और कोई समस्त जीवन को एक ही चेतना के रूप में क्यों देखता है ? पिछले लगभग एक शताब्दी में मनोविज्ञान , शिक्षा , दर्शन और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में अनेक विद्वानों ने मानव-विकास को समझाने के लिए विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किए हैं। जीन पियाजे ( Jean Piaget) ने बुद्धि और चिंतन के विकास का अध्ययन किया , लॉरेंस कोहलबर्ग ( Lawrence Kohlberg) ने नैतिक चेतना के विकास को समझाया , जेम्स फाउलर ( James Fowler) ने आस्था ( Faith) के विकास का मानचित्र प्रस्तुत किया , अब्राहम मैस्लो ( Abraham Maslow) ने मानव आवश्यकताओं की क्रमिक उन्नति का सिद्धां...

बाह्य आचरण और अंतर्भाव तारतम दृष्टि में “क्रिया–भाव भ्रांति”

बाह्य   आचरण और अंतर्भाव तारतम   दृष्टि में “ क्रिया–भाव भ्रांति ”   नरेन्द्र पटेल, टेम्पा, मई 30, 2016   प्रस्तावना: बाह्य आचरण और अंतर्भाव का अंतर मनुष्य प्रायः दूसरों का मूल्यांकन उनके बाहरी आचरण को देखकर करता है। कोई व्यक्ति मंदिर जाता है , भजन गाता है , सत्संग में बैठता है , सेवा करता है , धार्मिक भाषा बोलता है या आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन करता है , तो हम सहज ही मान लेते हैं कि उसकी चेतना भी उसी अनुपात में विकसित होगी। किंतु क्या वास्तव में ऐसा है ? महामति प्राणनाथजी की वाणी हमें बार-बार सावधान करती है कि बाहरी क्रिया और भीतरी भाव एक ही बात नहीं हैं। दो व्यक्ति एक ही चौपाई पढ़ सकते हैं , एक ही नाम का स्मरण कर सकते हैं , एक ही बीतक में बैठ सकते हैं , फिर भी उनकी चेतना की अवस्था , उनकी प्रेरणा और उनका अनुभव एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हो सकता है। एक व्यक्ति परंपरा निभाने आया है , दूसरा प्रेम में खिंचा चला आया है। एक सामाजिक पहचान के लिए बैठा है , दूसरा अपने निजस्वरूप की खोज में। बाहर से दोनों समान दिखाई देते हैं , पर भीतर की द...