🕯 ध्यान स्क्रिप्ट: भोजन से अद्वैत चेतना तक (Chopai Integrated Meditation) धीमे , शांत स्वर में पढ़ें। वाक्यों के बीच 5–7 सेकंड का मौन रखें.) 🌿 आरंभ: शरीर और चेतना की तैयारी धीरे से बैठें। सांसों पर ध्यान दें। सभी अंगों को ढीला छोड़ें। " मैं यहाँ हूँ। मैं इस क्षण में हूँ। मेरा शरीर मेरा घर है।" 𑁍 मानव जन्म का उद्देश्य और चेतावनी आवो अवसर केम भूलिए , कारण एक कोलिया अंन। एटला माटे आप मुझाई , केटला करो छो कई कोट विघन।।१।। मानव जन्म केवल पेट भरने के लिए नहीं—यह इसका सबसे छोटा उद्देश्य है। मैं अपने जीवन को केवल भूख और स्वाद के लिए नहीं गँवाऊँगा। 🥣 भौतिक और आवश्यक भोजन का ध्यान धीरे-धीरे कल्पना करें कि आप आवश्यक भोजन ग्रहण कर रहे हैं—जो शरीर को पोषण दे। सांस के साथ भोजन को महसूस करें। खाने को पेट माफक , और मुल्ला पढ़ावने कलाम।।४७।। केवल आवश्यकता के अनुसार ग्रहण करना—मन की लालसा नहीं। यह शरीर का वास्तविक संतुलन है। 💭 ...
On Integrity Be the Path: "Walking the Future with Integrity" "साँचा री साहेब साँच सों पाइए, "Only through truth can the True One be known; साँच को साँच है प्यारा।" And the True One loves Truth alone." Tartam Vani's Essence : "Only those souls who are free from deceit, grounded in truth, and awakened to self-realization can receive the knowledge of Paramdham . Though this world is filled with illusion and deception, the soul that has descended from Paramdham recognizes the truth in due time. Such a soul knows that the path to the Supreme Beloved can only be walked with sincere intent, divine wisdom, and inner purity." Poetic Version: Only the soul that's pure and true, With no deceit, and clear in view— Awake...
तारतम वाणी में प्रयुक्त 'धुतार' और 'छल' आदि शब्दों के समग्र अर्थ का विवेचन: माया , देह , बुद्धि , प्रपंच और आत्म-जागृति के संदर्भ में सारांश तारतम वाणी में प्रयुक्त "धुतार" , " धुतारी" , " छल" , " छलिया" , " प्रपंच" , " मोह" और "माया" जैसे शब्द सामान्य नैतिक धोखे का संकेत नहीं करते , बल्कि चेतना की उस गहरी विस्मृति को व्यक्त करते हैं जिसमें जीव अपने वास्तविक स्वरूप , अपने मूल घर और परम संबंध की पहचान खो देता है। इस भूल के कारण मनुष्य अस्थायी को स्थायी , देह को आत्मा और क्षणिक अनुभवों को परम आनंद समझ बैठता है। यही स्थिति माया का छल कहलाती है। यह भ्रम केवल मानसिक स्तर तक सीमित नहीं रहता ; यह देह , इन्द्रिय , विचार , सांस्कृतिक धारणाओं , धार्मिक पंथों और सामाजिक संरचनाओं में भी विभिन्न रूपों में कार्य करता है। परिणामस्वरूप संसार एक आकर्षक किंतु उलझाने वाला तंत्र बन जाता है जिसमें चेतना अपने मूल स्रोत से दूर भटकती रहती है। " धुतार" शब्द की विशेषता यह ह...
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