सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचें - भीतरी दुश्मनों के प्रति सजग रहें


निम्न तारतम वाणी का मंथन सभी सुन्दरसाथ अवश्य करें और अपने आप को आयने में देखें कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग तो हमसे नहीं हो रहा है: 

सारांश: 
कुछ लोग बाहर से अच्छे दिखते हैं, लेकिन भीतर मन में द्वेष, भ्रम या कपट रखते हैं। वे दूसरों को भी गलत दिशा में ले जाते हैं, पर श्री जी की कृपा -दृष्टि उन्हें पूर्ण रूप से त्यागती नहीं।
वे जीवन भर साथ रहते हैं, मीठे शब्द बोलते हैं, पर सच्चे मन से प्रेम नहीं कर पाते, न सेवा करके वास्तविक सुख-शांति पाते हैं।
श्री जी की कृपा सब पर समान रूप से है, पर जो लोग अपने कर्मों में सच्चे और जागरूक हैं, वही उस कृपा का वास्तविक अनुभव प्राप्त कर पाते हैं।

कई छिपे रहे मांहें दुस्मन, और मारें राह औरन।
चाल उलटी चल देखावहीं, तो भी धनी न तजें तिन।।११।।

अर्थ: कई लोग ऐसे थे जो भीतर से दुश्मन की तरह थे, लेकिन बाहर अच्छे व्यवहार का दिखावा करते थे और दूसरों को भी गलत दिशा में ले जाते थे। वे उल्टी/maya वाली चाल चलते रहे, फिर भी श्री जी (धनी) ने उन्हें नहीं छोड़ा।

दृष्ट उपली सजन हो रहे, बोल देखावें मीठे बैन।
जनम सारा धनी संग रहे, कबूं दिल न दिया सुख चैन।।१२।।

अर्थ: बाहरी रूप से वे सज्जन/अच्छे प्रतीत होते थे और मीठे—नरम—शब्द बोलते थे। वे सारी उम्र श्री जी के साथ रहे, पर कभी उन्होंने अपने दिल से प्रेम (सच्चा मन समर्पण) नहीं दिया और न ही सेवा करके सुख या चैन पायें।

इन बिध कई रंग साथ में, यों बीते कई बीतक।
सब पर मेहेर मेहेबूब की, पर पावे करनी माफक।।१३।।

अर्थ: इस प्रकार समूह में अलग-अलग प्रकार के लोग थे और उनके साथ कई घटनाएँ घटीं। श्री जी की कृपा सब पर समान रूप से थी, पर जो लोग अपने कर्मों (अपने व्यवहार/भक्ति की सच्चाई) के अनुसार रह पाए, वही सच में फल/अनुभव प्राप्त कर पाए।

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